वनग्राम गढ़ी

वनग्राम गढ़ी

 वनग्राम गढ़ी  


मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य जिला डिंडौरी जिले के शहपुरा जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत मगरटगर के अंतर्गत एक छोटा सा वनग्राम हैं गढ़ी!
वनग्राम गढ़ी डिंडौरी जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर और शहपुरा नगर से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित है.!
           वनग्राम गढ़ी , जंगलों के बीच बसे होने के कारण यह गाँव को वनग्राम घोषित किया गया हैं , वनग्राम जो होते है इन्हें प्रशासन द्वारा एक विशेष दर्जा प्राप्त होता है, यह गाँव जंगलों में बसे होने के कारण अति पिछड़े माने जाते है,

वनग्राम गढ़ी में कुछ विशाल पत्थरों की शिलाएं रखी हुई हैं , 
बताया जाता हैं कि वनग्राम गढ़ी में गोंडवाना राजाओं की यह कुछ निशानियां हैं जो आज भी यहां मौजूद है,


             यहां रखे पत्थरों की बड़ी बड़ी शिलाओं को गोंडवाना राजा द्वारा अपने सेवा मंत्र शक्ति के बल पर पत्थरों को चलाकर यहां लाये गए थे,
 जैसा कि आप लोगो ने देखा होगा कि ऊंचे ऊंचे पहाड़ों पर प्राचीन किला या भवन बने होते है आप भी सोचते होंगे कि जहाँ पैदल जाने का मार्ग नही हैं वहाँ ऐसे बड़े बड़े पत्थरों की शिलाएं आखिर कैसे लाये गए होंगे, 
हम आपको बताना चाहेंगे कि गोड़वाना राजा जो थे वह अपने सत्य ,धर्म, शक्ति के बल पर मंत्रो के माध्यम से पत्थरों को हांका(चलाया) करते थे, जिससे मंत्र से बड़े बड़े पत्थरों की शिलाएं खुद चलती थी और पत्थर की शिलाएं खुद चलकर ऊंचे पहाड़ों में पहुँच जाया करती थी..!
                      ग्राम गढ़ी में कुछ ऐसे ही विशाल पत्थरो की शिलाएं आज भी मौजूद है जिन्हें गोंडवाना राजाओं द्वारा मंत्रो के माध्यम से यहां लाये गए थे ,


बताया जाता हैं कि उस समय इन पत्थरों की शिलाओं से यहां किला निर्माण होना था लेकिन किसी कारण से यहां किला निर्माण नही हो सका , लेकिन किले के लिए आये गए पत्थर आज भी यहाँ मौजूद है, जो देखने मे ऐसा लगता हैं कि किसी कारीगर के हाथों से इन पत्थरों को गढ़े गए है , यह यह शिलाएं देखने मे बहुत ही प्राचीन नजर आता हैं..!
यह पत्थरों की शिलाएं गोड़वाना राज्य के इतिहास को दर्शाता है..!

ऐसा कहते है यह क्षेत्र पहले गोंडवाना राज्य के अंतर्गत आते थे जहाँ सैकड़ों वर्ष तक गोड़वाना राजाओं ने राज किया है , लेकिन अब इनकी सिर्फ कुछ निशानियां यहाँ आज भी मौजूद है, 

बाजन सिल्ली 



इस स्थान से कुछ ही दूरी पर स्थित हैं बाजन सिल्ली नामक स्थल , यहाँ एक पत्थर की शिला रखी हैं जिसे बजाने पर हर कोने में अलग अलग तरह की आवाजें आती हैं , इस पत्थर को बजाने पर ऐसा लगता हैं मानो वह पत्थर न हो बल्कि कोई धातु हो..!

         बाजन सिल्ली की मान्यता हैं कि जो भी लोग इस रास्ते से गुजरते हैं वह इस शिला को बजाए बिना नही जाते , और बाजन सिल्ली को बजाने से सभी तरह के परेशानीयो से छुटकारा मिलता हैं..!

 
हालांकि की देखरेख के आभाव के कारण यहाँ से कुछ पुरातत्व निशानियां चोरी हो गई हैं , बताया जाता हैं कि यहाँ पहले पत्थरों के घोड़े समेत बाजनसिल्ली से बड़ी शिलाएं चोरी हो गई..!

प्रशासन को ऐसे स्थलों पर नजर रखने की आवश्यकता है.




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